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त्रिदीब रमण ’उतनी बारूद अपने अंदर बचा कर रखना जितनी रखती हैं माचिस की तिल्लियां अंधेरों को मालूम हो तेरे जलने का हुनर’ शह-मात की सियासी…
त्रिदीब रमण ’इतना मलाल तो सूरज को भी हो रहा है तेरे जाने से तू कब पीछे रहा है बुझे दिलों में चिराग जलाने से’ सुलभ…
त्रिदीब रमण भभकती रोशनी, मेकअप रंगे चेहरे, चुप्पी साधे हुए कैमरे आइनाखाने ने भी जाने क्या यह कमाल का इनाम बख्शा है सबको दिखाते हैं आइने,…
त्रिदीब रमण ’जब इसां की अपनी पहचान पर वोट चस्पां हो जाता है उसकी सूरत मिट जाती है, वह एक गिनती रह जाता है’ एक पुरानी…
सियासत को तो यूं भी पंख फैला कर उड़ने की आदत होती है, ऐसे में जब बात हवाई अड्डों की हो तो सियासतदां भी आसमां से चुगली करने लग जाते हैं।
त्रिदीब रमण ’तेरा यूं रूठ जाना तेरी आदतों में शुमार है हम साये की तरह तेरी पलकों पर ठहरे रहे और तुम धूप की तरह मेरी…
योगी क्यों तलब किए गए दिल्ली?
त्रिदीब रमण ’जब से पागल हवाओं ने हर छोटे-बड़े दीयों का काम तमाम किया है इस आदम के जंगल ने अपना कल इन जुगनुओं के नाम…