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✍🏻मुदित अग्रवाल जब मैं बृहत्तर भारत की बात करता हूँ उसमें केवल भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश नहीं आता| उसमें आता है अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, श्रीलंका, नेपाल,…

✍🏻विवेक चौरसिया पितृ पक्ष भारतीय संस्कृति का अद्भुत महापर्व है। इसकी महिमा देखिए कि हिंदुओं के प्रमुख त्यौहार जैसे दशहरा, राखी, होली, श्री राम नवमी, श्री…

हर साल भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से लेकर आश्विन माह की अमावस्या तिथि तक पितृ पक्ष होता है. पितृ पक्ष की सभी 16 तिथियां बहुत ही खास होती हैं और ति​थि के अनुसार ही श्राद्ध कर्म किया जाता है.

श्राद्ध खत्म होने में अब बस कुछ दिन बाकी हैं. वहीं आज एकादशी श्राद्ध भी है. ऐसे में यदि आप बचे हुए दिनों में अपने पूर्वजों को प्रसन्न करना चाहते हैं तो ऐसे में चींटियों की मदद से उन्हें प्रसन्न कर सकते हैं. आप चींटी को खिलाकर पूर्वजों को भी तृप्त कर सकते हैं. आज का हमारा लेख इसी विषय पर है. आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि आप किन चीजों को चींटियों को खिलाकर अपने पूर्वजों को भी तृप्त कर सकते हैं.

श्राद्ध कर्म श्रद्धा का विषय है। यह पितरों के प्रति हमारी श्रद्धा प्रकट करने का माध्यम है। श्राद्ध आत्मा के गमन जिसे संस्कृत में प्रैति कहते हैं, से जुड़ा हुआ है। प्रैति ही बाद में बोलचाल में प्रेत बन गया। यह कोई भूत-प्रेत वाली बात नहीं है। शरीर में आत्मा के अतिरिक्त मन और प्राण हैं। आत्मा तो कहीं नहीं जाती, वह तो सर्वव्यापक है, उसे छोड़ दें तो शरीर से जब मन को निकलना होता है, तो मन प्राण के साथ निकलता है। प्राण मन को लेकर निकलता है।

समग्र समाचार सेवा नई दिल्ली, 28सितंबर। बाबुधाम ट्रस्ट के कार्यकर्ताओं ने “श्राद्ध मतलब श्रद्धा” योजना के तहत लोगो को गीता कॉलोनी में भोजन कराया।बाबुधाम ट्रस्ट ने श्राद्ध…

डॉ. ओमप्रकाश पांडे श्राद्ध कर्म श्रद्धा का विषय है। यह पितरों के प्रति हमारी श्रद्धा प्रकट करने का माध्यम है। श्राद्ध आत्मा के गमन जिसे संस्कृत…