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हाल ही में 21 सितंबर से 24 सितंबर 2022 तक श्रीमंता शंकरदेव कलाक्षेत्र गोहाटी में प्रज्ञा प्रवाह द्वारा तीसरे लोकमंथन का आयोजन किया गया। प्रस्तुत है लोकमंथन की उल्लेखनीय गतिविधियों पर सारपूर्ण श्रृंखलाबद्ध प्रस्तुति
प्रकृति पूजा सनातन संस्कृति का एक अंग है। इस प्रकृति पूजा में सूर्य उपासना भी शामिल है। उगते सूर्य को अर्घ्य देना संध्या वंदन के साथ जुड़ी पूजा विधान है लेकिन सूर्य के अस्ताचल होने पर भी इस संस्कृति में सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है।
आज़ादी का अमृत महोत्सव के बैनर तले संस्कृति मंत्रालय ने आर्ट ऑफ़ लिविंग के साथ भागीदारी की है ताकि लोगों और युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य के बारे में शिक्षित किया जा सके और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य के लिए ध्यान आदि से सशक्त बनाया जा सके।
अगर आप सनातन हिंदू संस्कृति के मुताबिक पूजा पाठ करते हैं, तो आपके कानों में इससे संबंधित कुछ खास शब्द जरुर पड़ते होंगे. आईए जानते हैं कि सनातन वैदिक-हिंदू परंपरा के मुताबिक पूजा पाठ में काम आने वाले इन 27 शब्दों का अर्थ➖:
हाल ही में 21 सितंबर से 24 सितंबर 2022 तक श्रीमंता शंकरदेव कलाक्षेत्र गोहाटी में प्रज्ञा प्रवाह द्वारा तीसरे लोकमंथन का आयोजन किया गया। प्रस्तुत है लोकमंथन की उल्लेखनीय गतिविधियों पर सारपूर्ण श्रृंखलाबद्ध प्रस्तुति
हाल ही में 21 सितंबर से 24 सितंबर 2022 तक श्रीमंता शंकरदेव कलाक्षेत्र गोहाटी में प्रज्ञा प्रवाह द्वारा तीसरे लोकमंथन का आयोजन किया गया। प्रस्तुत है लोकमंथन की उल्लेखनीय गतिविधियों पर सारपूर्ण श्रृंखलाबद्ध प्रस्तुति
हाल ही में 21 सितंबर से 24 सितंबर 2022 तक श्रीमंता शंकरदेव कलाक्षेत्र गोहाटी में प्रज्ञा प्रवाह द्वारा तीसरे लोकमंथन का आयोजन किया गया। प्रस्तुत है लोकमंथन की उल्लेखनीय गतिविधियों पर सारपूर्ण श्रृंखलाबद्ध प्रस्तुति
हाल ही में 21 सितंबर से 24 सितंबर 2022 तक श्रीमंता शंकरदेव कलाक्षेत्र गोहाटी में प्रज्ञा प्रवाह द्वारा तीसरे लोकमंथन का आयोजन किया गया। प्रस्तुत है लोकमंथन की उल्लेखनीय गतिविधियों पर सारपूर्ण श्रृंखलाबद्ध प्रस्तुति
हाल ही में 21 सितंबर से 24 सितंबर 2022 तक श्रीमंता शंकरदेव कलाक्षेत्र गोहाटी में प्रज्ञा प्रवाह द्वारा तीसरे लोकमंथन का आयोजन किया गया। इस दौरान बहुत महत्वपूर्ण सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की गई। प्रस्तुत है लोकमंथन की उल्लेखनीय गतिविधियों पर सारपूर्ण श्रृंखलाबद्ध प्रस्तुति
22 सितंबर 2022 को दोपहर के भोजन के बाद का सत्र आस्था और विज्ञान की परंपरा पर ज्ञान का अद्भुत संगम था। प्रोफेसर अभिराज राजेन्द्र मिश्र द्वारा सनातन संस्कृति में आस्था पक्ष की विवेचना और विदुषी डॉ. नीरजा गुप्ता द्वारा आस्था में समाहित विज्ञान की भारतीय दृष्टि ने एक नई चेतना प्रकट की।