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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो संदेश के माध्यम से कड़वा पाटीदार समाज की 100वीं वर्षगांठ को संबोधित किया।

सभी पाठकों को दीपावली की बधाई। क्या द्वापरयुग-त्रेतायुग संधिकाल के श्रीराम का जीवन कलियुग में प्रासंगिक है? वास्तव में, रामायण केवल आस्था का विषय नहीं, अपितु यह उन सब जीवनमूल्यों का समावेश है, जो व्यक्ति, समाज और विश्व को सुखी और संतुष्टमयी रहने का मार्ग दिखाता है। राम के जीवन यात्रा का विवेचनात्मक अध्ययन, बहुत से स्थापित मिथकों को ध्वस्त करते है।