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उम्र के आखिरी दौर में अपनी मूल पार्टी कांग्रेस छोड़ने के बाद वरिष्ठ राजनेता गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस के बारे में दिलचस्प टिप्पणी की वह ‘डॉक्टर के बजाय कंपाउंडर से दवा ले रही है।‘ मतलब साफ है कि कंपाउंडर की दवा से कांग्रेस के लाइलाज मर्ज का ठीक होना लगभग नामुमकिन है। लेकिन क्या खुद गुलाम नबी के पास हकीम लुकमान जैसी कोई दवा है, जिसके बूते पर वो अपने नए राजनीतिक अवतार में कुछ चमत्कार दिखा सकेंगे? कांग्रेस में बरसों बिताने और तमाम ओहदों पर सत्ता सुख भोगने के बाद गुलाम नबी ने अगर कांग्रेस छोड़ी है तो इसके पीछे कुछ ठोस कारण और पर्दे के पीछे जम्मू कश्मीर में बीजेपी की दूरगामी रणनीति दिखाई पड़ती है।