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स्वस्तिक अत्यन्त प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति में मंगल और शुभता का प्रतीक माना जाता रहा है। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य से पहले स्वास्तिक का चिन्ह अवश्य बनाया जाता है। स्वास्तिक शब्द सु+अस+क शब्दों से मिलकर बना है। ‘सु’ का अर्थ अच्छा या शुभ, ‘अस’ का अर्थ ‘सत्ता’ या ‘अस्तित्व’ और ‘क’ का अर्थ ‘कर्त्ता’ या करने वाले से है। इस प्रकार ‘स्वस्तिक’ शब्द में किसी व्यक्ति या जाति विशेष का नहीं, अपितु सम्पूर्ण विश्व के कल्याण या ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना निहित है। ‘

समग्र समाचार सेवा नई दिल्ली, 26नवंबर। हिंदू धर्म में हर महीने का खास महत्व होता है. अलग-अलग महीनों के हिसाब से ही देवी-देवताओं की पूजा की…

समग्र समाचार सेवा नई दिल्ली, 11 नवंबर। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी निशाना साधते हुए कहा कि…

श्री गायत्री स्तोत्रम् : माता गायत्री शक्ति, ज्ञान, पवित्रता तथा सदाचार का प्रतीक मानी जाती है। मान्यता है कि गायत्री मां की अराधना करने से जीवन…

समग्र समाचार सेवा नई दिल्ली, 29 जुलाई।  हिंदू धर्म में मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। अक्सर देखा जाता है कि कुछ लोग किसी भा काम…

समग्र समाचार सेवा नई दिल्ली, 16फरवरी। हरिद्वार में इस बार कुंभ मेले का आयोजन किया जा रहा है। हिंदू धर्म में कुंभ मेले का बहुत महत्व…

समग्र समाचार सेवा नई दिल्ली, 12 फरवरी। हिंदू धर्म में माता लक्ष्मी का एक खास स्थान है। लक्ष्मी माता को धन, समृद्धि की देवी माना जाता…