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आज सुबह से ही मानो घर में त्यौहार-सा माहौल लग रहा है। मम्मी जी के चेहरे की चमक और रसोई से आती पकवानों की महक दोनों की वजह एक ही है, ‘आज दोपहर को खाने (लंच) पर उनकी एक सहेली आने वाली हैं; आज घर को पूरी तरह से सजाया जा रहा है।

एक राजा था, बहुत प्रभावशाली, बुद्धि और वैभव से संपन्न। आस-पास के राजा भी समय-समय पर उससे परामर्श लिया करते थे। एक दिन राजा अपनी शैया पर लेेटे-लेटे सोचने लगा, मैं कितना भाग्यशाली हूं।

क्रोध में हार की झलक। बहुत समय पहले की बात है। आदि शंकराचार्य और मंडन मिश्र के बीच सोलह दिन तक लगातार शास्त्रार्थ चला। शास्त्रार्थ की निर्णायक थीं मंडन मिश्र की धर्म पत्नी देवी भारती।

समग्र समाचार सेवा देहरादून, 11अप्रैल। जिलाधिकारी गढ़वाल डा0 विजय कुमार जोगदण्डे अपने भ्रमण निरीक्षण कार्यक्रम के तहत जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कोट पहुंचे जहां उन्होने…