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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर की बिगड़ती हवा पर अदालत हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठ सकती। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बताया कि लॉकडाउन के…

कोयला, फर्नेस ऑयल इत्यादि जैसे अत्यधिक प्रदूषणकारी जीवाश्म ईंधन के उत्सर्जन से उत्पन्न होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने के अपने ठोस प्रयासों को जारी रखते हुए, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) और हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश (यूपी) की राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि सीआईएल की विभिन्न कोयला कंपनियों द्वारा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में कार्यरत सीआईएल के विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं/स्टॉकिस्टों/एजेंटों को कोयले की आपूर्ति/आवंटन नहीं किया जाए।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा शाम 4 बजे के एक्यूआई बुलेटिन के अनुसार दिल्ली का पूरा एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) आज 434 दर्ज हुआ है जिसमें बीते कल के मुकाबले एक्यूआई (371) में 63 अंकों की वृद्धि देखी गई है।

विभिन्न औद्योगिक, वाणिज्यिक और अन्य विविध इकाईयों से कोयला जैसे अत्यधिक प्रदूषणकारी ईंधनों के उत्सर्जन से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए, एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने आज उद्योगों/औद्योगिक इकाइयों सहित सभी क्षेत्रों को यह याद दिलाया कि वे 01.01.2023 से कोयले सहित अस्वीकृत ईंधनों (ताप विद्युत संयंत्रों में कम सल्फर वाले कोयले को छोड़कर) का उपयोग बंद करें या फिर भारी पर्यावरणीय मुआवजा (ईसी) के साथ-साथ इकाईयों की तुरंत बंदी का सामना करने के लिए तैयार रहें।