भारतीय संस्कृति का आर्तनादBy Samagra BharatJuly 26, 2023 *पूनम शर्मा विचर रही थी कि, मिली मुझे एक दिवस सूखे अधर, कृशकाय, मरणासन्न सदृश, भान हुआ कहीं देखा, मिली अवश्य, मैंने कौतूहल वश, पूछ…