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संस्कृति- पितृपक्ष- आभार भाव प्रकटन की पंचबलि
राज्यपाल अनुसुईया उइके रविवार को गरियाबंद जिले के राजिम में राष्ट्रीय चिल्हीडार महापूजा एवं बेटा ज्यौतिया महाव्रत कार्यक्रम में शामिल हुईं । इस अवसर पर राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा है कि आदिवासी सभ्यता और संस्कृति प्रकृति से जुड़े हैं। आदिवासी संस्कृति प्रकृति पूजक हैं। आदिकाल से ही जल,जंगल और जमीन से उनका गहरा नाता होता है। उन्होंने कहा कि गोंड़ी धर्म और संस्कृति को पुनर्जीवित करने के लिए इस प्रकार के धार्मिक आयोजन एक अच्छी पहल है।
संस्कृति- पितृपक्ष : भारतीय संस्कृति में श्राद्ध
संस्कृति: पितृपक्ष : तर्पण और श्राद्ध-भोज
संस्कृति- पितृपक्ष : पूर्वजों का पखवाड़ा
संस्कृति-राष्ट्रीय संगोष्ठी : भारत की एकात्मता और जन जातीय संस्कृति
संस्कृति–पर्यूषण पर्व: मिच्छामि दुक्कडम
सभ्यता अध्ययन केंद्र, जन जातीयकार्य मंत्रालय, भारत सरकार और वनवासी कल्याण आश्रम के संयुक्त आयोजन दो दिवसीय संगोष्ठी के दूसरे दिन 7 अगस्त 2022 को संगोष्ठी की मुख्य अतिथि थी जन जातीयकार्य राज्यमंत्री श्रीमती रेणुका सिंह सरुता। मंच पर विराजमान थे डॉ. लक्ष्मण सिंह मरकम उपसचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय मध्यप्रदेश और श्री रविशंकर निदेशक सभ्यता अध्ययन केंद्र।
दूसरे दिन 7 अगस्त को कार्यक्रम के औपचारिक शुरुआत से पहले स्टेज पर रेखा बहन आदिवासी परंपरा के कुछ भजन सुना रही थी। वे अपनी प्रस्तुति से पहले भजन का भाव भी बता रही थी। जैसे-ब्याह कारिज में सबसे पहले गणपति को आमंत्रित किया जाता है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कुशाभाऊ ठाकरे जन्म शताब्दी वर्ष समारोह में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान समेत अनेक गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।