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भारतीय सिनेमा में अनूठी अवधारणाओं और कहानी की दौड़ में आगे बढ़ते हुए निर्देशक प्रवीण कंद्रेगुला की कॉमेडी ड्रामा फिल्म ‘सिनेमा बंदी’ आपको एक ऑटो ड्राइवर से सिनेमावाला तक की यात्रा की दिल को छू लेने वाली कहानी से बांधे रखेगी।
बहुत ज्यादा अधिकार जमाने वाला और बहुत ज्यादा रोक-टोक करने वाला एक बेटा अपने बुजुर्ग पिता पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश करता है। उसका मानना है कि वह जो भी कर रहा है, उसके पिता के लिए वही सबसे अच्छा है। उधर, उसके पिता अपने अधूरे सपनों को पूरा करना चाहते हैं, जिसके लिए उन्हें टॉनिक यानी खुशहाल जिंदगी जीने के सहारे के तौर पर एक दवा की जरूरत होती है।
“हम जिस चीज के लिए संघर्ष करते हैं वह भारत के वास्तविक लोगों के लिए है। वे शायद नहीं जानते हैं कि देश का राष्ट्रपति कौन है या कोलकाता या मुंबई कहां है, लेकिन ये भारत के असली लोग हैं।” लेखिका-सामाजिक कार्यकर्ता महाश्वेता देवी के जीवन पर आधारित बायोपिक फिल्म ‘महानंदा’ इन शब्दों के पीछे की भावना को जीवंत करती है,
“धाबरी कुरुवी” एक ऐसी आदिवासी लड़की की प्रचंड यात्रा को दिखाती है, जो रूढ़िवाद से लड़ती हैं और खुद को उन जंजीरों से मुक्त करना चाहती हैं, जिनसे समाज व समुदाय ने उसके जैसे दूसरों को जकड़ रखा है। यह भारतीय सिनेमा के इतिहास में पहली फिल्म है, जिसमें केवल जनजातीय समुदाय से संबंधित कलाकारों ने अभिनय किया है।
‘थ्री ऑफ अस’ महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में प्रचलित एक रिलेशनशिप ड्रामा है। इस फिल्म का निर्देशन अविनाश अरुण ने किया है, और इसमें शेफाली शाह, जयदीप अहलावत और अभिनेता-गीतकार स्वानंद किरकिरे मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म के निर्देशक अविनाश अरुण ने कहा, “मैंने अपने बचपन के 3-4 साल कोंकण में बिताए और वहां प्रकृति के साथ मेरी पहली बातचीत हुई।
‘सिया’ एक असरदार फिल्म है जो हमारी सामाजिक न्याय प्रणाली को प्रतिबिंबित करती है। ये उन लोगों के मानवीय पक्ष को चित्रित करने का प्रयास है जिनके साथ अन्याय हुआ है। ये बातें कहीं फिल्म ‘सिया’ के निर्देशक मनीष मूंदड़ा ने, जो कि इंसाफ के लिए एक ख़राब पितृसत्तात्मक व्यवस्था से लड़ने वाली एक लड़की की दिल दहला देने वाली कहानी है।
‘द कश्मीर फाइल्स’ के मुख्य अभिनेता अनुपम खेर ने कहा कि 32 साल बाद इस फिल्म ने दुनिया भर के लोगों को 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों के साथ हुई त्रासदी के बारे में जागरूक होने में मदद की है। वे पणजी, गोवा में 53वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में आयोजित इफ्फी टेबल टॉक्स में हिस्सा ले रहे थे।
गर्मी के मौसम के एक गर्म दिन में पालोमा ने अपनी सबसे प्यारी कल्पना को साकार करने का फैसला लिया: अपने प्रेमी ज़े के साथ चर्च में एक पारंपरिक शादी। वह पपीते के बागान में एक किसान के रूप में कड़ी मेहनत करती है और एक समर्पित माँ है।
समाचार पत्र में एक व्यक्ति के बारे में एक लेख छपा था जो अपने पालतू कुत्तों के लिए अपने अपार्टमेंट के पड़ोसियों से लड़ जाता है। इस कहानी ने निर्देशक रोड्रिगो ग्युरेरो को फिल्म “सिएटे पेरोस (सेवन डॉग्स)” बनाने के लिए प्रेरित किया।
पाकिस्तानी डायरेक्टर और राइटर सईम सादिक के निर्देशन वाली फिल्म ‘जॉयलैंड’ को अपने ही देश पाकिस्तान में बैन कर दिया गया है। ‘जॉयलैंड’ पाकिस्तान की तरफ से ऑस्कर की ऑफिशियल एंट्री वाली फिल्म है। यह फिल्म 18 नवंबर को सिनेमाघरों में आने वाली थी।