Browsing: IFFI 53
टॉलीवुड के मेगास्टार और पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित कोनिदेला शिव शंकर वरा प्रसाद, जिन्हें लोकप्रिय रूप से चिरंजीवी के नाम से जाना जाता है, उन्हें गोवा में भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) के 53वें संस्करण के समापन समारोह में आज ‘2022 का इंडियन फिल्म पर्सनैलिटी पुरस्कार’ प्रदान किया गया।
किशोर कुमार की दिव्य आवाज और राजेश खन्ना का दमदार चरित्र एक बार फिर इस सदाबहार गीत के साथ पणजी के मैकिनेज पैलेस ऑडिटोरियम के पर्दे पर जीवंत हो उठा, और ये दर्शकों के लिए एक सुनहरा क्षण था। गुजरे जमाने की अभिनेत्री और दर्शकों के दिल की धड़कन आशा पारेख, जिन्होंने इस फिल्म में मुख्य किरदार निभाया और इस गाने में भी नजर आई थीं,
‘गुरुजन 15वीं-16वीं शताब्दी के असमिया महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव को एक संगीतमय श्रद्धांजलि है।’
बहुत ज्यादा अधिकार जमाने वाला और बहुत ज्यादा रोक-टोक करने वाला एक बेटा अपने बुजुर्ग पिता पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश करता है। उसका मानना है कि वह जो भी कर रहा है, उसके पिता के लिए वही सबसे अच्छा है। उधर, उसके पिता अपने अधूरे सपनों को पूरा करना चाहते हैं, जिसके लिए उन्हें टॉनिक यानी खुशहाल जिंदगी जीने के सहारे के तौर पर एक दवा की जरूरत होती है।
दिनांक 26 नवंबर, 2008- एक ऐसा दिन जिसे कोई भी भारतीय कभी नहीं भूल सकता। एक ऐसा दिन जब भारत आतंकवादी हमलों से थर्रा उठा था जिसने उसकी वाणिज्यिक राजधानी मुंबई को हिलाकर रख दिया था।
श्रीलंका (तब सीलोन कहा जाता था) में सिनेमा की शुरुआत 1901 में हुई, देश में पहली बार ब्रिटिश गवर्नर वेस्ट रिजवे और दूसरे बोअर युद्ध के कैदियों के लिए एक निजी प्रदर्शन के तहत एक फिल्म दिखाई गई। यह एक लघु फिल्म थी, जिसमें बोअर युद्ध में ब्रिटेन की जीत, महारानी विक्टोरिया को दफनाया जाना और एडवर्ड सप्तम के राज्याभिषेक को दिखाया गया था।
“जन्म से ही कोई अभिनेता नहीं होता। स्कूल के नाटक में मेरा पहला अभिनय एक आपदा था। लेकिन मेरे पिता ने मुझे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करने के लिए शाम को फूल भेंट किए।” ये बात प्रसिद्ध अभिनेता अनुपम खेर ने आज गोवा में आयोजित 53वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) से अलग ‘स्क्रीन और थिएटर के लिए अभिनय’ विषयवस्तु पर आयोजित मास्टरक्लास में कही।
गोवा में आयोजित किए जा रहे 53वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के इंडियन पैनोरमा खंड का आरंभ आज पूरे भारत से एकत्र की गई कहानियों को बड़े पर्दे पर जीवंत रूप से उतारने के वादे के साथ हुआ।
अमेरिका के मशहूर लेखक जेस लैयर ने कहा है कि बच्चे कोई ऐसी चीज नहीं हैं, जिसे ढाला जा सके, बल्कि लोगों को खुद को उजागर करना है। भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) का 53वां संस्करण बचपन और उसके सामाजिक-आर्थिक संदर्भों को आकार देने वाले सपनों, गतिशील शक्तियों और बारीकियों को सामने लाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
उत्तर पूर्व की आठ बहनों (राज्यों) में से एक मणिपुर, जिसे ‘भारत का आभूषण’ भी कहा जाता है, भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) के 53वें संस्करण में उत्तर पूर्व भारत की फिल्मों के प्रचार के लिए सबसे आगे होगा।