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बिखरते रिश्ते का सच … प्रस्तुति -:कुमार राकेश मोहन बेटा ! मैं तुम्हारे काका के घर जा रहा हूँ . क्यों पिताजी ? और तुम आजकल…

कल की चिंता क्यों ? कुमार राकेश एक राजा की पुत्री के मन में वैराग्य की भावनाएं थीं। जब राजकुमारी विवाह योग्य हुई तो राजा को…

एक संत भिक्षा में मिले अन्न से अपना जीवत चला रहे थे। वे रोज अलग-अलग गांवों में जाकर भिक्षा मांगते थे। एक दिन वे गांव के बड़े सेठ के यहां भिक्षा मांगने पहुंचे। सेठ ने संत को थोड़ा अनाज दिया और बोला कि गुरुजी मैं एक प्रश्न पूछना चाहता हूं।

जो 1980 के दशक में जो शोले बनी थी , वो काफ़ी लोकप्रिय हुई थी, अब एक नयी फ़िल्म “राहुल की दाढ़ी व शोले”बनी है , उसके डायलॉग सुनिए -आनंद आएगा -खुश रहिए व जगत को भी खुश रहिए -जगत का मतलब जगत प्रकाश नाड्डा नहीं समझ लेना आप -यहाँ जगत का मतलब हमारी दुनिया से है ,

*कुमार राकेश शायद आपको याद हो,वो खनकती हुयी ऊर्जान्वित ,भावो से ओत-प्रोत,वो अविस्मरणीय,ओजस्वी आवाज़:~~~~~~~~******. –:मै समय हूँ:– -महाभारत का वो सूत्रधार – हाँ,वही वो आवाज़ जो…

प्रस्तुति -कुमार राकेश ये वो उर्दू के शब्द जो आप प्रतिदिन प्रयोग करते हैं, इन शब्दों को त्याग कर मातृभाषा का प्रयोग करें! असीम आनंद की…

शिव कौन है? इस चित्रण में शिव को एक इंसान के रूप बनाया गया था, या भारतीय प्राचीन ऋषियों द्वारा मानव जाति के लिए इस ब्रह्मांडीय चेतना को समझने के लिए यह चित्र नियोजित किया गया था, । हम इस चित्रण के प्रत्येक पहलू का विश्लेषण करते हैं:

प्रत्येक व्यक्ति अलग इंद्रिय से मरता है। किसी की मौत आंख से होती है, तो आंख खुली रह जाती है—हंस आंख से उड़ा। किसी की मृत्यु कान से होती है।

हे ईश्वर ,अपने देश भारत को क्या हो गया है? अपने स्वार्थ के लिए देश के बलिदानियों का सहारा लिया जा रहा है.ऐसा क्यों? कहाँ बलिदानी भगत सिंह ,कहाँ भ्रष्टाचार के आरोपी दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया? कोई तुलना है क्या ? कोई तुलना हो सकती है क्या ?