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हर साल भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से लेकर आश्विन माह की अमावस्या तिथि तक पितृ पक्ष होता है. पितृ पक्ष की सभी 16 तिथियां बहुत ही खास होती हैं और ति​थि के अनुसार ही श्राद्ध कर्म किया जाता है.

श्राद्ध कर्म श्रद्धा का विषय है। यह पितरों के प्रति हमारी श्रद्धा प्रकट करने का माध्यम है। श्राद्ध आत्मा के गमन जिसे संस्कृत में प्रैति कहते हैं, से जुड़ा हुआ है। प्रैति ही बाद में बोलचाल में प्रेत बन गया। यह कोई भूत-प्रेत वाली बात नहीं है। शरीर में आत्मा के अतिरिक्त मन और प्राण हैं। आत्मा तो कहीं नहीं जाती, वह तो सर्वव्यापक है, उसे छोड़ दें तो शरीर से जब मन को निकलना होता है, तो मन प्राण के साथ निकलता है। प्राण मन को लेकर निकलता है।

श्राद्ध उसी व्यक्ति का किया जाता है जिसनें पंचतत्वों से बनी देह रूप में जन्म लिया और उसकी मृत्यु हुए एक साल बीत चुका है। अर्थात उसकी बरसी हो चुकी है। उसके बाद जो पितृपक्ष आएगा, उस समय व्यक्ति की मृत्यु तिथि पर उस व्यक्ति का श्राद्ध मनाया जाएगा। श्राद्ध में पंचबलियों (पंचग्रास) का बड़ा महत्व है।

समग्र समाचार सेवा रायपुर, 5अक्टूबर। राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने राजभवन में पितृ पक्ष के अवसर पर पौधरोपण किया। उन्होंने नागरिकों से अपील करते हुए कहा…

डॉ. ओमप्रकाश पांडे श्राद्ध कर्म श्रद्धा का विषय है। यह पितरों के प्रति हमारी श्रद्धा प्रकट करने का माध्यम है। श्राद्ध आत्मा के गमन जिसे संस्कृत…