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झारखंड सरकार ने राज्य में स्थानीयता को परिभाषित करने के लिए 1932 के खतियान को आधार बनाने का फैसला किया है. सरकार के इस फैसले के अनुसार वैसे लोग जिनके वंशजों का नाम 1932 के खतियान यानि की जमीन के सर्वे में है वही झारखंड के स्थानीय निवासी कहलाएंगे.