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प्रत्येक वर्ष आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में पंचमी तिथि को ललिता पंचमी मनायी जाती है। ललिता पंचमी को उपांग ललिता व्रत के नाम से भी जाना जाता है। वहीं हिन्दू धर्म में इस व्रत का बहुत महत्व बताया गया है। इस दिन माता ललिता का व्रत रखना अत्यंत ही शुभ और मंगलकारी माना जाता है। ललिता पंचमी शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन मनायी जाती है।

पहाड़ों पर रहकर सांसारिक जीवों में नवचेतना का निर्माण करने वालीं स्कंदमाता। नवरात्रि में पांचवें दिन इस देवी की पूजा-अर्चना की जाती है। कहते हैं कि इनकी कृपा से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है। स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम से अभिहित किया गया है। इनके विग्रह में भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 30 सितंबर को गुजरात में 51 शक्तिपीठों में से एक अंबाजी मंदिर गए और वहां दर्शन किया एवं पूजा-अर्चना की।

हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का बेहद ही खास महत्व है और भक्तजन मां दुर्गा का आशीर्वाद पाने के लिए पूरे 9 दिनों तक विधि-विधान के साथ व्रत करते हैं. 9 दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होती है.

हिंदू पंचांग के अनुसार आज यानि 29 सितंबर को नवरात्रि का चौथा दिन है और यह दिन मां दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप को समर्पित है. इस दिन विधि-विधान के साथ माता कुष्मांडा का पूजन किया जाता है.मान्यता है कि आठ भुजाओं वाली माता कूष्मांडा अपने भक्तों के सभी कष्ट व परेशानियों का नाश करती हैं.

नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने का विधान है। मां दुर्गा की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। मां चंद्रघंटा का स्वरूप परम शान्तिदायक और कल्याणकारी है। नवरात्रि के तीसरे दिन यानि कल मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है।

। हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है और इस दौरान 9 दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न रूपों का पूजन किया जाता है. मान्यता है कि यदि इस दौरान मां भक्तों से प्रसन्न हो जाएं तो उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं. अगर आप भी मां दुर्गा का आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो नवरात्रि के दौरान कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. आइए जानते हैं नवरात्रि में क्या करें और क्या न करें?

शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन 27 सितंबर 2022, मंगलवार को है। नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है।

तमिलनाडु में एक वृद्ध ब्राह्मण पूजा करते करते ही काया छोड़ गए । मैं हमेशा कहता हूं ब्राह्मण सनातन का वो सेतु है जिसने इतिहास के सारे थपेड़े झेल कर भी सनातन की पोथी नहीं छोड़ी,ओर सदियों से सनातन को हिन्दुओ की एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में रोपते रहा.. #हजारों वर्षों से सनातन धर्म को हिंदुओं की एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुंचाते रहे।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जे पी नड्डा ने शनिवार को पंचकूला में माता मनसा देवी मंदिर में पूजा-अर्चना की।