भारत ने यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स काउंसिल (यूएनएचआरसी) की रिपोर्ट पर यूएन को कड़ा जवाब दिया है। भारत ने कश्मीर पर आई यूएन की रिपोर्ट को ‘प्रेरित’ बताया है। भारत का कहना है कि यह रिपोर्ट कश्मीर में आतंकवाद को कानूनी मान्यता देती है। आपको बता दें कि इस रिपोर्ट में आतंकी संगठनों को ‘हथियारों से लैस संगठन’ करार दिया है। इस रिपोर्ट में जम्मू कश्मीर में मानवाधिकारों के हनन की बात कही गई है। भारत ने पिछले हफ्ते रिपोर्ट को पूरी तरह से ‘झूठा और गलत मंशा से प्रेरित’ बताया था। रिपोर्ट में भारत के अलावा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में भी मानवाधिकार हनन की बात कही गई है। इसमें विवादित तौर पर भारत से कहा गया है, ‘कश्मीर की लोगों की इच्छा का सम्मान किया जाए।झूठी और गलत मंशा से प्रेरित रिपोर्ट यूएनएचआरसी में राजदूत राजीव के चंदर ने भारत की पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि भारत इस ‘झूठी’ और ‘गलत मंशा से प्रेरित’ रिपोर्ट पर खेद जताता है जिसे भारत की ओर से पहले ही खारिज किया जा चुका है। इस रिपोर्ट में कुछ चुनिंदा तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया है और सच को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है। यह काउंसिल के लिए गहरी चिंता का विषय होना चाहिए कि जिन संगठनों को यूनाइटेड नेशंस (यूएन) की ओर से आतंकी संगठन बताया गया है उन्हें ‘हथियारबंद संगठन’ कहा गया है और आतंकी संगठनों के आकाओं को ‘लीडर’ बताया गया है। राजीव के चंदर ने कहा कि भारत यूएन से अपील करता है कि आतंकवाद को कानूनी वैधता देने वाली इस रिपोर्ट को खारिज करे। आतंकी संगठनों के आका यूएन के लिए लीडर यूएन ने लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद को आतंकी संगठन माना गया है। लेकिन हाल ही में आई यूएनएचआरसी की रिपोर्ट में 38 बार इन संगठनों के लिए ‘आर्म्ड ग्रुप’ यानी ‘हथियारों से लैस संगठन’ इस शब्द का प्रयोग किया गया है। वहीं पीओके को रिपोर्ट में 26 बार ‘आजाद जम्मू कश्मीर’ के तौर पर बताया गया है। वहीं लश्कर और जैश के आतंकी सरगनाओं को रिपोर्ट में सिर्फ ‘लीडर’ कहकर संबोधित किया गया है। वहीं यूएनएचआरसी के मुखिया जैद राद अल हुसैन ने फिर से कश्मीर में हत्याओं की जांच की मांग दोहराई है। साथ ही उन्होंने पिछले हफ्ते आतंकवादियों की गोलियों का शिकार हुए राइजिंग कश्मीर के एडीटर शुजात बुखारी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
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