बीएमसी का कहना है कि मस्जिद का निर्माण अवैध तरीके से किया गया था और स्थानीय कानूनों का उल्लंघन किया गया है। इसके चलते उन्होंने मस्जिद को ढहाने का निर्णय लिया। हालांकि, मुस्लिम समुदाय के लोग इसे धार्मिक असहिष्णुता के रूप में देख रहे हैं और उनकी मांग है कि उन्हें उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए।
विरोध प्रदर्शन के दौरान, मुस्लिम समुदाय के सदस्यों ने नारेबाजी की और बीएमसी की कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताया। उनका कहना है कि इस प्रकार की कार्रवाई से उनके धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन होता है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अगर बीएमसी को किसी प्रकार की अवैध गतिविधि की जानकारी थी, तो उसे पहले समुदाय के साथ चर्चा करनी चाहिए थी।
इस स्थिति ने स्थानीय प्रशासन को भी चिंता में डाल दिया है। पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है और स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया है। अधिकारियों ने समुदाय के नेताओं के साथ बातचीत करने का प्रयास किया है, ताकि स्थिति को शांत किया जा सके और किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।
धारावी, जो कि एशिया के सबसे बड़े झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में से एक है, में इस प्रकार की घटनाएँ अक्सर देखी जाती हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि सरकार को उनके निवास के हालात और धार्मिक स्थलों के प्रति संवेदनशीलता से विचार करना चाहिए।
समुदाय के नेताओं ने बीएमसी से अपील की है कि वह स्थिति को समझें और उचित कार्रवाई करें। उन्होंने यह भी कहा कि सभी धर्मों का सम्मान किया जाना चाहिए और किसी भी प्रकार की कार्रवाई से पहले संवाद का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।
यह घटना धार्मिक सहिष्णुता और स्थानीय प्रशासन की नीतियों पर फिर से एक बार चर्चा का विषय बन गई है। सभी की निगाहें अब इस बात पर होंगी कि बीएमसी और समुदाय के बीच बातचीत का परिणाम क्या निकलता है और क्या स्थिति को शांत किया जा सकेगा।