सुप्रिया सुले ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि भाजपा और उसके गठबंधन के साथी दल भ्रष्टाचार में पूरी तरह से डूबे हुए हैं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में भाजपा के नेताओं के खिलाफ जांच चल रही है, लेकिन इस सबके बावजूद पार्टी के नेता अपनी ज़िम्मेदारियों से मुंह मोड़े हुए हैं। सुले ने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी अपने राजनीतिक लाभ के लिए झूठी जानकारी फैलाने और इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने में लगी हुई है।
सुले ने यह भी कहा कि BJP द्वारा इतिहास को विकृत करने का उद्देश्य समाज में एकजुटता की भावना को कमजोर करना और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच दरार पैदा करना है। उनका कहना था कि बीजेपी द्वारा किए जा रहे इस प्रकार के प्रयास से भारतीय समाज की सांस्कृतिक धरोहर और साझी विरासत को नुकसान हो रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा द्वारा जो ऐतिहासिक घटनाएँ और व्यक्तित्वों का प्रचार किया जा रहा है, वह भारतीय इतिहास के वास्तविक तथ्यों से बहुत दूर हैं।
सुप्रिया सुले ने बीजेपी के रवैये को ‘अत्यधिक राजनीतिक’ बताते हुए कहा कि यह पार्टी देश की समस्याओं से ज्यादा अपनी राजनीतिक फायदे की चिंता करती है। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा सचमुच देश के विकास के बारे में चिंतित होती, तो वह भ्रष्टाचार की जांच को गंभीरता से लेती और विकृत इतिहास के प्रचार की बजाय सच्चाई को सामने लाने का काम करती।
सुले ने यह भी कहा कि BJP और उसके सहयोगी दलों द्वारा जनभावनाओं को भड़काने वाले बयान दिए जा रहे हैं, जो देश की सामाजिक एकता को खतरे में डाल सकते हैं। उनके मुताबिक, ऐसे बयान केवल राजनीति के लिए किए जा रहे हैं, जबकि देश में बेरोजगारी, महंगाई और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
यह बयान भारतीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे रहा है, क्योंकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह सब विपक्षी दलों की एक साजिश है, ताकि जनता का ध्यान असल मुद्दों से हटाया जा सके। भाजपा के प्रवक्ता ने कहा कि सुप्रिया सुले के आरोप निराधार हैं और उनका उद्देश्य सिर्फ पार्टी की छवि को धूमिल करना है।
भले ही बीजेपी इन आरोपों का खंडन कर रही हो, लेकिन सुप्रिया सुले के बयान ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या भारतीय राजनीति में सचमुच विकृत इतिहास और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है? आने वाले दिनों में इस पर और भी बहस होने की संभावना है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और विपक्ष इस मुद्दे पर किस तरह से अपनी स्थिति स्पष्ट करते हैं।