समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,17 फरवरी। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल के सरकारी बंगले की जाँच के आदेश दिए गए हैं। केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) ने इस जाँच की पहल की है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि बंगले के निर्माण और साज-सज्जा में किसी प्रकार के नियमों का उल्लंघन हुआ था या नहीं।
6 फ़्लैग स्टाफ़ रोड का सरकारी बंगला जांच के घेरे में
दिल्ली के 6 फ़्लैग स्टाफ़ रोड पर स्थित यह आलीशान बंगला 40,000 वर्ग गज में फैला हुआ है और लगभग 8 एकड़ की जमीन पर बना हुआ है। यह बंगला तब सुर्खियों में आया था जब इसके निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने का आरोप लगा था। कहा जाता है कि यह बंगला ₹45 करोड़ की लागत से बनाया गया था, जिसमें ₹11.30 करोड़ केवल इंटीरियर डिज़ाइन और डेकोरेशन पर खर्च किए गए थे।
विपक्ष के निशाने पर रही ‘शीश महल’ की राजनीति
बीजेपी ने इस मुद्दे को कई बार चुनावी बहस का हिस्सा बनाया और इसे ‘शीश महल’ कहकर जनता के सामने रखा। विपक्ष का आरोप था कि आम आदमी पार्टी, जो हमेशा सादगी और पारदर्शिता की बात करती थी, उसने सरकारी धन का दुरुपयोग कर इस बंगले को अत्यधिक भव्य तरीके से बनवाया।
2015 से 2024 तक केजरीवाल का सरकारी निवास
अरविंद केजरीवाल 2015 से 2024 तक दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे और इस दौरान वे इसी बंगले में रहते थे। अब जब उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया है, तो उनके इस सरकारी बंगले की जाँच को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
क्या निकलेंगे नए खुलासे?
CVC द्वारा जारी आदेश के बाद अब जाँच एजेंसियां इस बात की पड़ताल करेंगी कि बंगले के निर्माण और नवीनीकरण में किसी सरकारी नियम या बजट का उल्लंघन किया गया था या नहीं। यदि कोई अनियमितता पाई जाती है, तो यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है।
इस जाँच के राजनीतिक असर को लेकर भी चर्चाएँ तेज हो गई हैं। बीजेपी और अन्य विपक्षी दल पहले ही इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। अब देखना होगा कि CVC की जाँच में क्या तथ्य सामने आते हैं और इसका दिल्ली की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।