समग्र समाचार सेवा
जम्मू,7 मार्च। जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी द्वारा महाराजाओं को “तानाशाह” (dictators) कहे जाने को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस बयान के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और अन्य संगठनों ने जम्मू और कश्मीर के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किया और उनसे माफी की मांग की।
डॉ. करण सिंह की प्रतिक्रिया
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जम्मू-कश्मीर के अंतिम महाराजा हरि सिंह के पुत्र डॉ. करण सिंह ने भी चौधरी के बयान की आलोचना की और उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की अपील की। उन्होंने कहा कि इतिहास को गलत तरीके से प्रस्तुत करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह डोगरा समाज की भावनाओं को भी आहत करता है।
भाजपा और अन्य संगठनों का विरोध
भाजपा ने जम्मू और कठुआ जिलों में जोरदार प्रदर्शन किया, वहीं भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के कार्यकर्ताओं ने जम्मू के कच्ची छावनी क्षेत्र में विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए उपमुख्यमंत्री पर डोगरा समुदाय के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि महाराजा हरि सिंह को “तानाशाह” कहना ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करने के समान है, जबकि उनके खिलाफ विद्रोह करने वालों को शहीद बताना गलत है।
डोगरा विरासत और अस्मिता का मुद्दा
डोगरा समुदाय ने हमेशा महाराजाओं को अपनी संस्कृति और गौरव का प्रतीक माना है। महाराजा हरि सिंह को विशेष रूप से उनके सुधारवादी दृष्टिकोण और राज्य के भारत में विलय में उनकी भूमिका के लिए जाना जाता है। ऐसे में, इस बयान ने पूरे डोगरा समाज में नाराजगी पैदा कर दी है।
माफी की मांग और राजनीतिक प्रभाव
इस पूरे विवाद के बीच भाजपा और अन्य संगठनों ने उपमुख्यमंत्री से माफी मांगने की मांग की है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे का असर आगामी चुनावों में भी देखा जा सकता है, क्योंकि डोगरा समुदाय राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
निष्कर्ष
महाराजाओं को “तानाशाह” कहने का मामला अब एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुका है। उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी के इस बयान को लेकर जनता में रोष व्याप्त है, और विरोध प्रदर्शन लगातार तेज हो रहे हैं। अब देखना होगा कि चौधरी अपने बयान पर कायम रहते हैं या सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हैं।