केंद्र सरकार की घोषणा और शांति संदेश
FOCS के अध्यक्ष थो. मणिहर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की हालिया घोषणा की सराहना की, जिसमें उन्होंने 8 मार्च से मणिपुर की सभी सड़कों पर मुक्त आवागमन की गारंटी दी थी। मणिहर ने स्पष्ट किया कि इस मार्च का मुख्य उद्देश्य शांति का संदेश देना है, न कि किसी समुदाय को भड़काना।
उन्होंने कहा, “यह टकराव का मार्च नहीं है, बल्कि मेल-मिलाप और समझौते का संदेश है। हमें विश्वास है कि यह पहल तनाव को कम करने में मदद करेगी और केंद्र सरकार की स्वतंत्र आवाजाही की प्रतिबद्धता को दर्शाएगी।”
विरोध के बावजूद अपील
हालांकि तीन प्रमुख कुकी संगठनों ने इस मार्च का विरोध किया है, फिर भी मणिहर ने उन्हें अपनी स्थिति छोड़ने और शांति पहल में शामिल होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “प्रतिरोध करने के बजाय, हम उनसे अनुरोध करते हैं कि वे इस नेक पहल का समर्थन करें। यह सभी समुदायों के लिए एक साथ बैठने, सामंजस्य स्थापित करने और एक बेहतर आपसी समझ बनाने का अवसर है।”
मार्च का मार्ग और भावी योजनाएँ
शांति मार्च की शुरुआत 8 मार्च को सुबह 8 बजे इम्फाल के कांगला गेट से होगी, जो मेइती लोगों का एक सांस्कृतिक प्रतीक माना जाता है। यह मार्च कुकी बहुल कांगपोकपी जिले से गुजरते हुए सेनापति जिले में समाप्त होगा।
FOCS ने यह भी घोषणा की कि भविष्य में अन्य स्थानों पर भी शांति मार्च आयोजित किए जाएंगे, जिनमें सीमा नगर मोरेह तक की यात्रा भी शामिल होगी। यह संगठन की दीर्घकालिक शांति स्थापना प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
समर्थन और मणिपुर में बढ़ता तनाव
जहाँ कुकी संगठनों ने इस मार्च पर आपत्ति जताई है, वहीं आदिवासी संगठनों जैसे कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (COTU) और इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (ITLF) ने इस पहल के प्रति समर्थन व्यक्त किया है। मणिहर ने इन संगठनों से अपील की कि वे मार्च के पीछे एकजुट हों, क्योंकि यह आपसी विभाजन को खत्म करने और समुदायों के बीच विश्वास बहाल करने का एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
निष्कर्ष
मणिपुर में हाल के वर्षों में मेइती और कुकी समुदायों के बीच जातीय और राजनीतिक संघर्ष बढ़ा है, जिससे राज्य में अशांति और अस्थिरता बनी हुई है। FOCS को उम्मीद है कि यह शांति मार्च मेल-मिलाप और संवाद का अवसर प्रदान करेगा, जिससे राज्य में स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त हो सके।