चीन पर ट्रंप का टैरिफ सबसे ज्यादा असर डाल सकता है। पहले भी ट्रंप प्रशासन ने चीन पर कई टैरिफ लगाए थे, जिससे चीनी निर्यातकों को भारी नुकसान हुआ था।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर – अमेरिका चीन से इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल, मशीनरी और केमिकल्स का बड़ा आयात करता है। टैरिफ बढ़ने से इन क्षेत्रों को तगड़ा झटका लगेगा।
इकोनॉमिक ग्रोथ पर असर – चीन की अर्थव्यवस्था पहले से ही स्लोडाउन झेल रही है, ऐसे में अमेरिकी टैरिफ इसे और कमजोर कर सकता है।
अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर तेज होगा – चीन जवाबी कार्रवाई कर सकता है, जिससे व्यापारिक संबंध और बिगड़ सकते हैं।
भारत को फायदा: अमेरिका चीन से जो सामान आयात करता है, उनमें से कई चीजें भारत भी बना सकता है। खासकर टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटोमोबाइल और आईटी सेक्टर को भारत में बढ़ावा मिल सकता है।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से डूबने की कगार पर है। अमेरिका अगर पाकिस्तान पर टैरिफ बढ़ाता है, तो यह उसके लिए और बड़ी मुसीबत बन सकता है।
टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर को झटका – पाकिस्तान का सबसे बड़ा निर्यात सेक्टर टेक्सटाइल है, जो अमेरिका पर काफी निर्भर है। अगर टैरिफ बढ़ा, तो पाकिस्तान के लिए निर्यात मुश्किल हो जाएगा।
डॉलर की कमी और महंगाई बढ़ेगी – पाकिस्तान पहले ही विदेशी मुद्रा संकट से जूझ रहा है। अमेरिका से व्यापार प्रभावित होने पर उसकी स्थिति और खराब हो सकती है।
नई नौकरियों पर असर – निर्यात कम होने से हजारों लोगों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।
भारत को फायदा: अमेरिकी कंपनियां पाकिस्तान के टेक्सटाइल उत्पादों का विकल्प ढूंढेंगी, जिससे भारत के टेक्सटाइल उद्योग को सीधा फायदा हो सकता है।
बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा गारमेंट इंडस्ट्री पर टिका है। यह देश दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा गारमेंट एक्सपोर्टर है, और अमेरिका इसका सबसे बड़ा खरीदार है।
अगर ट्रंप टैरिफ बढ़ाते हैं, तो बांग्लादेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को बड़ा नुकसान होगा।
मौजूदा निर्यात ठप पड़ सकता है, जिससे लाखों लोगों की नौकरियों पर असर पड़ेगा।
नई इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट पर भी असर होगा, जिससे विकास दर धीमी हो सकती है।
भारत को फायदा: अगर बांग्लादेश की गारमेंट इंडस्ट्री प्रभावित होती है, तो भारत के टेक्सटाइल निर्यातकों को नए ऑर्डर मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
अगर ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी लागू होती है, तो चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश को इसका सीधा नुकसान होगा। लेकिन भारत अगर सही रणनीति अपनाए तो इसे बड़े फायदे में बदला जा सकता है।
टेक्सटाइल सेक्टर को मजबूत करने की जरूरत।
फार्मा और मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को ग्लोबल सप्लाई चेन में लाने का मौका।
अमेरिका से ट्रेड डील्स कर भारतीय उत्पादों को वहां ज्यादा बढ़ावा देना।
अगर भारत इन मौकों का सही इस्तेमाल करता है, तो वह अमेरिका के लिए चीन का मजबूत विकल्प बन सकता है और अपने ट्रेड मार्केट को तेजी से बढ़ा सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या भारत इस ‘आपदा में अवसर’ को भुना पाता है या नहीं!