समग्र समाचार सेवा
गुवाहाटी, असम, 10 फरवरी :गौहाटी उच्च न्यायालय ने IIT गुवाहाटी के एक प्रोफेसर के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न से जुड़े आपराधिक मामले को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि प्राथमिकी (FIR) में लगाए गए आरोप भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 के तहत “हमला” या “आपराधिक बल” की श्रेणी में नहीं आते। अदालत के अनुसार, केवल हाथ पकड़ना, वह भी बिना किसी जबरदस्ती के, IPC की धारा 349 में परिभाषित “बल” की कानूनी कसौटी पर खरा नहीं उतरता।
क्या थे आरोप और पृष्ठभूमि
यह मामला अहमदाबाद की एक उद्यमी द्वारा की गई ऑनलाइन शिकायत से शुरू हुआ। शिकायतकर्ता ने बताया कि वर्ष 2022 में स्टार्टअप मेंटरशिप के सिलसिले में संपर्क के दौरान प्रोफेसर ने कार में छोड़ते समय “अजीब” टिप्पणियां कीं और कई बार उनकी हथेली पकड़कर हस्तरेखा देखने की कोशिश की। इसके अलावा, उनसे कामाख्या मंदिर के पास प्रार्थना करने को कहा गया। निचली अदालत ने इन आरोपों के आधार पर IPC की धारा 354 के तहत संज्ञान लिया था, जिसके बाद प्रोफेसर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कार्यवाही रद्द करने की मांग की।
कानून की व्याख्या और कोर्ट की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने IPC की धारा 349 (बल), 350 (आपराधिक बल) और 351 (हमला) की व्याख्या करते हुए कहा कि “बल” तभी माना जाएगा जब किसी व्यक्ति के पूरे शरीर की गति में परिवर्तन, रुकावट या दिशा में जबरन बदलाव किया जाए। अदालत के अनुसार, शिकायत में ऐसा कोई उल्लेख नहीं है कि शिकायतकर्ता को जबरन हिलाया-डुलाया गया या उसकी गति रोकी गई। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि “मात्र स्पर्श” को धारा 349 के तहत बल नहीं माना जा सकता, और जब बल की परिभाषा पूरी नहीं होती, तो धारा 350 के तहत आपराधिक बल का प्रश्न भी नहीं उठता।
विभागीय जांच और देरी पर सवाल
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि प्रोफेसर के खिलाफ विभागीय जांच पहले ही हो चुकी थी, जिसमें शिकायतकर्ता की भागीदारी थी और आरोपों को निराधार पाया गया। इसके बाद करीब ढाई महीने की देरी से FIR दर्ज होने को अदालत ने संदेहास्पद माना और कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग जैसा प्रतीत होता है।
व्यापक असर
इस फैसले से यौन उत्पीड़न कानूनों की व्याख्या पर नई बहस छिड़ गई है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि हर अनुचित व्यवहार कानूनी रूप से “आपराधिक बल” नहीं बनता, हालांकि यह सामाजिक और नैतिक रूप से गलत हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से मामलों में कानूनी मानकों की सख्ती से जांच पर जोर बढ़ेगा।
मात्र स्पर्श करना ‘अपराध’ नहीं : गुवाहाटी हाईकोर्ट ने IIT प्रोफेसर को राहत दी
Next Article लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव
Related Posts
Add A Comment
© 2026 Samagra Bharat News website. All Rights Reserved.
