Saturday, September 19

अध्यात्म

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने देशवासियों को ‘श्रीकृष्ण जन्माष्टमी’ के पावन पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। गृह मंत्री ने नई…

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दहशरे पर नीलकण्ड के दर्शन को शुभ माना जाता है। नीलकंठ पक्षी पर कहा गया है कि, नीलकंठ तुम नीले रहियो, दूध-भात का भोजन करियो, हमरी बात राम से कहियो। इन पंक्तियों में नीलकंठ को भगवान का प्रतिनिधि माना गया है।

नवरात्रि में 9 दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों का पूजन किया जाता है और इसके बाद 10वें दिन दशहरा का त्योहार मनाया जाता है. दशहरा हिंदू धर्म का लोकप्रिय त्योहार है जो कि लोगों को बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है. इस दिन मेले का आयोजन होता है रावण दहन किया जाता है. कई जगहों पर दशहरा को विजय दशमी के नाम से भी जाना जाता है और इस बार यह त्योहार 5 अक्टूबर 2022, बुधवार के दिन मनाया जाएगा.

प्रत्येक वर्ष आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में पंचमी तिथि को ललिता पंचमी मनायी जाती है। ललिता पंचमी को उपांग ललिता व्रत के नाम से भी जाना जाता है। वहीं हिन्दू धर्म में इस व्रत का बहुत महत्व बताया गया है। इस दिन माता ललिता का व्रत रखना अत्यंत ही शुभ और मंगलकारी माना जाता है। ललिता पंचमी शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन मनायी जाती है।

नवरात्रि के दिनों में जवारों की पूजा का बहुत महत्त्व होता है। शारदीय नवरात्र हो या गुप्त नवरात्र, जवारे के बिना मां दुर्गा की पूजा अधूरी मानी जाती है। घट-स्थापना के साथ ही जवारे हेतु गेहूं बोया जाता है। तत्पश्चात् नौ दिन तक इन अंकुरित गेहूं जिन्हें ‘जवारे’ कहा जाता है, उनकी पूर्ण श्रद्धाभाव से पूजा-अर्चना की जाती है।

भारतीय अवधारणा में हिरण्यगर्भ जिसे पाश्चात्य विज्ञान बिग बैंग के रूप में देखता है, से अस्तित्व में आए इस दृष्यादृष्य जगत के सभी प्रपंच चाहे वह जड़ हों या चेतन, सभी निर्विवाद रूप से शक्ति के ही परिणाम हैं। हम सभी का श्वांस-प्रश्वांस प्रणाली, रक्त संचार, हृदय की धड़कन, नाड़ी गति, शरीर संचालन, सोचना समझना, सभी कुछ शक्ति के द्वारा ही संभव होता है। जो कुछ भी पदार्थ के रूप में हैं,

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