Friday, September 18

वास्तु

लोकसमुदाय का अपना लालित्य है और लोकजीवन की अपनी लालिमा। लोक के लोचन स्मृतियों का सुरमा आंजते हैं। लोक के कान सदियों के स्वर सुनते हैं और नाक को प्रिय गंध मिट्टी की सौरभ वाली होती है। लोक की अपनी लीला लहर और लज्जा, सज्जा के लहरिया हैं। कार्तिक की वेला उन विचित्रताओं को उभारती हैं।

यह तिथि स्वास्थ्यरक्षण की दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण मानी गई है तथा इसे धन्वन्तरि अवतार से सम्बद्ध बताया गया है।
एक वनस्पति जिसे अपामार्ग , चिरचिटा, लटजीरा, चिचड़ी आदि नामों से जानते हैं , इसका प्रयोग करने हेतु निर्देश प्राप्त होता है।

आज धनतेरस है।धनतेरस दीपावली की दस्तक है। हम धनतेरस की चौखट पर खड़े होकर दीपावली की तरफ देखते हैं, धनतेरस स्वास्थ्य और समृद्धि के बीच जागरूकता का पर्व है। धनतेरस लक्ष्मीपूजा और नए बरतन खरीदने के कर्मकांड के साथ ही आयुर्वेद के प्रणेता व वैद्यकशास्त्र के देवता भगवान धन्वंतरि का जन्मदिन भी है।

दीपावली में हर व्यक्ति चाहता है की लक्ष्मी उस पर प्रसन्न हो लक्ष्मी देवी को प्रसन्न करने और दीवाली पर धन पाने के कुछ उपाय-
(1)- दीपावली पूजन में 11 कोड़ियां, 21 कमलगट्टा, 25 ग्राम पीली सरसों लक्ष्मीजी को चढ़ाएं (एक प्लेट में रखकर अर्पण करें)। अगले दिन तीनों चीजें लाल या पीले कपड़े में बांधकर तिजौरी में या जहां पैसा रखते हों वहां, रख दें।

(2)- दीपावली के दिन अशोक वृक्ष की जड़ का पूजन करने से घर में धन-संपत्ति की वृद्धि होती है।

हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन धनतेरस का पर्व मनाया जाता है. इस साल यह तिथि 22 और 23 अक्टूबर दोनों दिन पड़ रही है. इसलिए दोनों ही धनतेरस का त्योहार मनाया जाएगा. लेकिन अधिकतर पंडितों व विद्वानों का मानना है कि धनतेरस का त्योहार 22 अक्टूबर को मनाना अधिक शुभ होगा.

22 अक्टूबर 2022 को धनतेरस से प्रकाश उत्सव दिवाली की शुरुआत हो जाएगी. धनतेरस के दिन भगवान विष्णु के अवतार भगवान धनवंतरी ने जन्म लिया है. धनतरेस का त्योहार खरीदारी के लिए बहुत शुभ माना जाता है. धन, संपत्ति, समृद्धि के लिए धनतेरस पर आभूषण, बर्तन, जमीन, वाहन खरीदे जाते हैं लेकिन कुछ ऐसी वस्तुएं भी हैं जो भूलकर भी इस दिन खरीदकर घर नहीं लाना चाहिेए.

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