Saturday, September 19

सिनेमा

सुप्रीम कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को राहत देते हुए दो सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में कम…

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“जब पहले-पहल भारत में अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया, तो एक प्रश्न जो अक्सर पूछा जाता था: इस उत्सव का उद्देश्य क्या है, यह किस प्रयोजन को पूरा करेगा? इसके उत्तर के दो भाग थे: पहला, फिल्म महोत्सव जिस देश में आयोजित होता है, वह वहां के दर्शकों को महोत्‍सव में भाग लेने वाले सभी फिल्म-निर्माता देशों में निर्मित बेहतरीन फिल्‍में देखने में सक्षम बनाता है; दूसरा, अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव प्रतिभागी देशों के मोशन-पिक्चर उद्योगों में संलग्‍न लोगों को आपस में मिलने तथा समान सरोकारों के बारे में चर्चा करने, कला के इस स्‍वरूप के क्षेत्र में हुई प्रगति के बारे में नोट्स की तुलना करने और भावी विकास की योजना बनाने का अवसर प्रदान करता है”।

फिल्मों की प्रबुद्ध सराहना और इनके प्रति प्रबल लगाव को बढ़ाने के साथ-साथ प्रोत्‍साहित करते हुए 53वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का समापन गोवा के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी इंडोर स्टेडियम में सितारों से सजे एक भव्य समारोह के साथ हुआ।

किसे परम्परा से अलग हटकर कुछ नया करना कहा जा सकता है, आईएफएफआई 53 के प्रतिनिधियों को एक फिल्म के बजाय, एक भावना की स्क्रीनिंग से प्रेरित होने का एक अनूठा अवसर मिला। हम पर विश्वास नहीं है? कानून प्रवर्तन और न्याय प्रणाली की कमियों को सामने रखने वाले और सबसे साहसी निर्देशकों में से एक, था से ग्नानवेल के शब्दों में, “लेकिन, आपको हमारी बात पर विश्वास करना होगा।“

किशोर कुमार की दिव्य आवाज और राजेश खन्ना का दमदार चरित्र एक बार फिर इस सदाबहार गीत के साथ पणजी के मैकिनेज पैलेस ऑडिटोरियम के पर्दे पर जीवंत हो उठा, और ये दर्शकों के लिए एक सुनहरा क्षण था। गुजरे जमाने की अभिनेत्री और दर्शकों के दिल की धड़कन आशा पारेख, जिन्होंने इस फिल्म में मुख्य किरदार निभाया और इस गाने में भी नजर आई थीं,

भारत के 53वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में इजरायल के निर्देशक, लेखक और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता ज्यूरी के अध्यक्ष नादव लापिड ने कहा कि फिल्म महोत्सव का मुख्य विचार सिनेमा की केवल एक दृष्टि को प्रस्तुत करना नहीं है, बल्कि विभिन्न विकल्पों को सामने लाना है।

वर्ष 2020 के दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित होने के अपने अनुभव को साझा करते हुए, दिग्गज अभिनेत्री सुश्री आशा पारेख ने कहा कि एक लंबे समय के बाद एक महिला को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस पुरस्कार को पाने पर अपने आश्चर्य और खुशी को व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, “मैं यह पुरस्कार पाने वाली पहली गुजराती भी हूं।

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