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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि कि चन्द्रयान-3 का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव सॉफ्ट पावर कूटनीति में भारत का उभरना था। उन्होंने कहा, ‘सॉफ्ट लैंडिंग के समय विश्व के सभी प्रमुख चैनल इस पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे और हमें बधाई दे रहे थे।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, डा. सुदेश धनखड़ के साथ 27 अगस्त, 2023 को राजस्थान का दौरा करेंगे। इस एक-दिवसीय यात्रा में वे जयपुर और अपने गृह जनपद झुंझुनूं जाएंगे।
भारत कर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ आज अपने विद्यालय – सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ पहुंचे और वहाँ छात्रों, पूर्व-छात्रों और शिक्षकों से मिले। ज्ञात रहे कि उपराष्ट्रपति धनखड़ ने सन 1962 से 1967 तक अपनी स्कूली शिक्षा यहीं से पूरी की थी।
“अपने देश को हमेशा पहले रखें, यह वैकल्पिक नहीं है, यह आवश्यक नहीं है, यही एकमात्र रास्ता है, हम सभी इस देश के ऋणी हैं।”
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कोविड-19 महामारी के दौरान हमारे स्वास्थ्य कर्मियों के योगदान और नि:स्वार्थ सेवा की सराहना की। उन्होंने कहा कि हमारे डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ ने हमारे सभ्यतागत लोकाचार में अपना विश्वास व्यक्त किया और अपनी जान को जोखिम में डालकर भी हमारी मदद की।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आज पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर ‘सदैव अटल’ जाकर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता एवं सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉ. बिंदेश्वर पाठक के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है।
मैं नवरोज़ के शुभ अवसर पर सभी नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं, जो पारसी नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण हुई लोगों की मौत पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने घायल लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए भी प्रार्थना की।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शनिवार को उन माता-पिता के प्रति अपनी असहमति व्यक्त की जो अपने बच्चों से बहुत अधिक अपेक्षा करते हैं और उन्हें प्रशासनिक अधिकारी या इंजीनियर बनने के लिए प्रेरित करते हैं, जबकि बच्चा वास्तव में संगीतकार या फोटोग्राफर बनना चाहता है।
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समग्र भारत.!!!एक नाम है विचार का ,समाचार का ,आन्दोलन का ,समग्रता का ,समग्रता में अनेकता का,वैश्विक भारत का और हमारी राष्ट्र भाषा –राज भाषा हिंदी को विश्व पटल पर स्थापित करने का.सबको पता है कि हिंदी की आजीवन वकालत हमारे भारत के उपराष्ट्रपति श्री भैरों सिंह शेखावत ने की थी.उनके ही परिकल्पना के अनुसार और उनके आशीर्वाद से हमारी टीम ने “समग्र भारत” का प्रकाशन वर्ष २००३ में शुरू किया गया था.जो आज भी कई प्रकार के संघर्षों के वावजूद अनवरत जारी है.
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