Browsing: शीशे के सामने आत्म-साक्षात्कार का दर्द

पत्थर और शीशा जो कभी मेरे छूने से पिघल जाया करती थी आज मुझ से बात करने से भी कतराती है। अब कोई क्या करे, कब…