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नवरात्रि के सभी 9 दिन बेहद ही महत्वपूर्ण और खास होते हैं. सबसे खास होती है नवरात्रि की अष्टमी व नवमी तिथि. आज यानि 29 मार्च को अष्टमी तिथि का पूजन किया जा रहा है और यह दिन मां महागौरी को समर्पित है.
आज यानि 28 मार्च को चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है और इस सप्तमी नवरात्रि का व्रत रखा जाएगा. सप्तमी नवरात्रि मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप को समर्पित है और इस दिन मां कालरात्रि का पूजन किया जाता है.
हिंदू धर्म में होली एक प्रमुख और खास त्योहार है. देशभर में इसे बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है. होली से एक दिन पहले होलिका दहन होता है जिसे छोटी होली भी कहते हैं.
सीता अष्टमी 2023: हिंदू धर्म में फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन सीता अष्टमी यानि जानकी जयंती मनाई जाती है.
हिंदी पंचांग के अनुसार आज फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है और इसे द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है. संकष्टी चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है और इस दिन विधि-विधान के साथ उनका पूजन किया जाता है.
हिंदू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व है और प्रत्येक एकादशी का नाम उसके महत्वपूर्ण के अनुसार रखा गया है. आज यानि 2 जनवरी 2023 को पौष माह की एकादशी तिथि है जिसे सनातन धर्म में पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है. यह साल 2023 की पहली एकादशी है.
हिंदू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व है और हर माह दो एकादशी के व्रत आते हैं. इस प्रकार साल में कुछ 24 एकादशियां आती हैं और प्रत्येक एकादशी अपना एक विशेष महत्व रखती है. हिंदू पंचांग के अनुसार आज यानि 19 दिसंबर को पौष माह यानि पूस की एकादशी है जिसे सफला एकादशी के नाम से जाना जाता है.
हिंदू पंचांग के अनुसार आज यानि 7 दिसंबर को मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा तिथि है और हिंदू धर्म में इस तिथि का विशेष महत्व है. भक्तजन इस दिन भगवान विष्णु का आशीर्वाद पाने के लिए व्रत-उपवास व दान करते हैं. कहते हैं कि पूर्णिमा का व्रत करने से देवतागण प्रसन्न होते हैं और मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं.
हिंदू धर्म में सोम प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है और इस दिन भगवान शिव और उनके परिवार का पूजन होता है. प्रदोष व्रत का मतलब है कि इस दिन शाम के समय पूजन किया जाता है और लोग भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए व्रत करते हैं. सो
बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में छठ पूजा एक महापर्व है और यह चार दिनों तक चलता है. इस दौरान महिलाएं 36 घंटे का निर्जला व्रत करती हैं और भगवान सूर्य समेत छठी मैया का भी पूजन किया जाता है. इस महापर्व की शुरुआत 28 अक्टूबर से हो गई है और 31 अक्टूबर का इसका समापन होगा.