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’जब धू-धू कर जले थे सारे अरमान मेरे माचिस की डिब्बियों पर थे निशान तेरे’ अपने अस्तित्व को बचाए रखने की लड़ाई लड़ रही कांग्रेस को…
’इन चुप्पियों के हाथ कैसे रंगे हैं खून से क्षत-विक्षत शब्द पड़े हैं जो हर तरफ मौन से’ एकनाथ शिंदे के सिर अभी-अभी तो सिरमौर…
’तेरी चाहतों का इस कदर असर है, तेरे सिवा कोई और नहीं जहां तक ये सहर है ज़िद है कि तेरे लिए फलक से चांद तोड़…
त्रिदीब रमण ’कहां तो हौसला था कि आसमां से सूरज उतार लाएंगे तेरी जुल्फों में उलझे सावन से हम भी बहार लाएंगे पर नए दौर का…
’कितनी मुद्दत से सोए नहीं हो तुम सारा हम हिसाब छोड़ आए हैं ज़िद करके हम भी तुम्हारी आंखों में चंद ख्वाब छोड़ आए हैं’ पिछले…
त्रिदीब रमण तेरे कूचे से अपनी याराना पुरानी कहां काम आई निकाले गए ऐसे जैसे तुझसे कोई नाता न था हरजाई’ बिहार प्रदेश कांग्रेस…
’हम तो कड़ी धूप में तेरी ओर नंगे पांव चले चले तुम भी पर संभल कर छांव-छांव चले’ राजस्थान की प्रखर…
त्रिदीब रमण ’हमारे हौसले कम न थे, रगों में दौड़ते खून में भी रफ्तार थी भले कितनी ही कुंद हमारे तलवारों की धार थी दुश्मन…
“तेरी आंखों में ही हर शाम गुजारी है पर, अपने हिस्से का उजाला मैं साथ लाया हूं” देश के प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक एक गंभीर…
’हर शै रौशनी पर हौसलों की दास्तां बयां है नए साल में उम्मीदों का यह सूरज नया है’ पंजाब का चुनावी घमासान दिलचस्प मुहाने पर आ…